बिगाड़ करने वालों के विरुद्ध सहायता
رَبِّ انْصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَ.
رَبِّ انْصُرْنِي عَلَى الْقَوْمِ الْمُفْسِدِينَ
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उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! इन बिगाड़ पैदा करने वाले लोगों के विरुद्ध मेरी सहायता कर।
इस दुआ में «अनसुरनी» (انْصُرْنِي) आदेशवाचक रूप है। यह लूत अलैहिस्सलाम की उस क़ौम के विरुद्ध दुआ है, जो घोर बुराई में डूबी हुई थी और धरती पर बिगाड़ फैलाती थी।
शैख़ अब्दुर्रहमान अस-सादी की तफ़सीर
उनके नबी उनसे निराश हो गए और जान गए कि वे अज़ाब के पात्र हैं। उनके लगातार झुठलाने से वे बहुत व्याकुल हुए, इसलिए उन्होंने उनके विरुद्ध दुआ की और कहा: «ऐ मेरे पालनहार! बिगाड़ करने वाली क़ौम के विरुद्ध मेरी सहायता कर।» अल्लाह ने उनकी दुआ स्वीकार कर ली।
इमाम इब्न कसीर की तफ़सीर
इसीलिए अल्लाह के नबी ने उनके विरुद्ध सहायता माँगी और कहा: «ऐ मेरे पालनहार! बिगाड़ करने वाली क़ौम के विरुद्ध मेरी सहायता कर।»
अल-बग़वी की तफ़सीर
लूत ने कहा: «ऐ मेरे पालनहार! बिगाड़ करने वाली क़ौम के विरुद्ध मेरी सहायता कर», अर्थात् अज़ाब के बारे में मेरी बात को सच सिद्ध करके।
«सहीह अल-बुख़ारी» (हदीस संख्या 3373) में उन फ़रिश्तों का वाक़िआ वर्णित है, जो इब्राहीम और लूत अलैहिमस्सलाम के पास आए थे।