رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنْفُسَنَا، وَإِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا، وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ.
رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنْفُسَنَا وَإِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
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ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने आपपर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया तथा हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।[7]
रूप: अपनी आवश्यकता की दशा का वर्णन और पाप की स्वीकारोक्ति (इक़रारुन बिज़-ज़ंब)। यह मानव इतिहास की पहली दुआ है, जिसके द्वारा अल्लाह ने आदम को तौबा करने का तरीक़ा सिखाया।
शैख़ अब्दुर्रहमान अस-सादी की तफ़सीर
तब अल्लाह ने उन दोनों पर कृपा की और उनकी तौबा क़बूल की। उन्होंने अपने पाप को स्वीकार किया और अल्लाह से उसकी क्षमा माँगी। दोनों ने कहा: «ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने ऊपर अत्याचार किया है। यदि तूने हमें क्षमा न किया और हम पर दया न की, तो हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे»।
अर्थात्, हमने वह पाप किया जिससे तूने हमें रोका था और पाप करके अपने ही साथ अन्याय किया। यदि तू पाप के निशान और उसकी सज़ा को मिटाकर हमें क्षमा न करे, और हमारी तौबा क़बूल करके हमें ऐसी ग़लतियों से सुरक्षित रखते हुए हम पर दया न करे, तो हमने घाटे का कारण अपना लिया है। अतः अल्लाह ने उन दोनों को क्षमा कर दिया। «और आदम ने अपने पालनहार की अवज्ञा की, तो वह भटक गए।
फिर उनके पालनहार ने उन्हें चुन लिया, उनकी तौबा क़बूल की और उन्हें मार्ग दिखाया» (सूरा ताहा, 20:121–122)। जबकि इब्लीस अपनी सरकशी पर अड़ा रहा और अपनी अवज्ञा से बाज़ नहीं आया। इसलिए जो व्यक्ति पाप हो जाने पर आदम की तरह उसे स्वीकार करे, क्षमा माँगे, पछताए और उससे रुक जाए, उसका पालनहार उसे चुनता है और मार्ग दिखाता है। और जो इब्लीस जैसा हो—पाप हो जाने पर भी लगातार अवज्ञा में बढ़ता जाए—वह अल्लाह से केवल और अधिक दूर होता जाता है।
इमाम इब्न कसीर की तफ़सीर
अद-दह्हाक़ बिन मुज़ाहिम ने अल्लाह के इस कथन «ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने ऊपर अत्याचार किया है। यदि तूने हमें क्षमा न किया और हम पर दया न की, तो हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे» के बारे में कहा: «ये वे शब्द हैं जिन्हें आदम ने अपने पालनहार, महिमावान और महान, से प्राप्त किया था»।
अल-बग़वी की तफ़सीर
«दोनों ने कहा: ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने ऊपर अत्याचार किया है। यदि तूने हमें क्षमा न किया और हम पर दया न की, तो हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे»।
अल-हाकिम की «अल-मुस्तद्रक» (2/375) में ऐसी रिवायतें वर्णित हैं कि आदम जन्नत से निकलने के बाद रोते हुए ये शब्द कहते थे।