दुआ 27 सीधा मार्ग और दृढ़ता 40 मिनट पढ़ने का समय

अल्लाह से दया और मार्गदर्शन

ईमानवाले गुफावासी युवक 18:10
अरबी पाठ

رَبَّنَا آتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً، وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا.

رَبَّنَا آتِنَا مِنْ لَدُنْكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا

अरबी पाठ क़ुरआन से मात्राओं सहित लिया गया है। الكهف 18:10
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आवाज़
लिप्यंतरण रब्बना आतिना मिन लदुनका रह्मतन व हय्यिअ् लना मिन अम्रिना रशदा
अर्थानुवाद
Azizul Haq Al-OmariHI

जब उन युवकों ने गुफा में शरण ली[4], तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमें अपने पास से दया प्रदान कर और हमारे लिए हमारे मामले में मार्गदर्शन (सीधे रास्ते पर चलने) को आसान कर दे।

अर्थ और विशेषता

इस दुआ में «आतिना» (آتِنَا — हमें प्रदान कर) और «हय्यिअ्» (هَيِّئْ — हमारे लिए तैयार कर/आसान कर) क्रियाएँ आई हैं। यह ईमानवाले उन युवकों की दुआ है, जो अपना ईमान सुरक्षित रखने के लिए बहुदेववादी अत्याचारी शासक से भागे थे।

व्याख्या और सीख

शैख़ अब्दुर्रहमान अस-सादी की तफ़सीर

फिर अल्लाह ने उनकी कहानी का संक्षेप में उल्लेख किया और आगे उसका विस्तार से वर्णन किया। «जब वे युवक गुफा में जा पहुँचे»—अर्थात युवा लोग। वे अपनी क़ौम की ओर से आने वाली परीक्षा और फ़ितने से बचने तथा सुरक्षित रहने के लिए गुफा में गए। «तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार!

हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर»—अर्थात ऐसी दया, जिसके द्वारा तू हमें दृढ़ रखे, बुराई से सुरक्षित रखे और भलाई की तौफ़ीक़ दे। «और हमारे मामले में हमारे लिए सही राह की व्यवस्था कर»—अर्थात हमारे लिए हर उस कारण को आसान कर दे, जो सही मार्ग तक पहुँचाता है; और हमारे दीन तथा दुनिया के मामलों को सुधार दे। इस तरह उन्होंने फ़ितने से बचने के लिए प्रयास किया और ऐसी जगह की ओर पलायन किया जहाँ वे छिप सकें; साथ ही, उन्होंने विनम्रता से अल्लाह से अपने मामलों को आसान करने की विनती की। उन्होंने न तो अपने ऊपर भरोसा किया और न ही लोगों पर। इसलिए अल्लाह ने उनकी दुआ स्वीकार की।

इमाम इब्न कसीर की तफ़सीर

अल्लाह तआला का कथन «जब वे युवक गुफा में जा पहुँचे, तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर और हमारे मामले में हमारे लिए सही राह की व्यवस्था कर»—इसमें अल्लाह उन युवकों का उल्लेख करता है, जो अपनी क़ौम से अपना दीन बचाकर भागे थे, ताकि वे उन्हें उनके दीन से फेरकर फ़ितने में न डाल दें। वे उनसे दूर भागे और अपनी क़ौम से छिपने के लिए पहाड़ की एक गुफा में शरण ली। वहाँ दाख़िल होकर उन्होंने अल्लाह तआला से उसकी दया और कृपा माँगते हुए कहा : «ऐ हमारे पालनहार!

हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर»—अर्थात अपनी ओर से हमें ऐसी दया प्रदान कर, जिसके द्वारा तू हम पर दया करे और हमें हमारी क़ौम से छिपाकर सुरक्षित रखे। «और हमारे मामले में हमारे लिए सही राह की व्यवस्था कर»—अर्थात इस मामले में हमारे लिए सही राह का निर्णय कर और हमारे अंजाम को सही बना दे। जैसा कि हदीस में आया है : “और तू हमारे लिए जो भी फ़ैसला करे, उसके अंजाम को सही बना दे।” मुस्नद में बुस्र बिन अबी अरताअ से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ यह दुआ करते थे : “ऐ अल्लाह!

हमारे सभी मामलों के अंजाम को अच्छा कर दे और हमें दुनिया की रुसवाई तथा आख़िरत की यातना से बचा।”

अल-बग़वी की तफ़सीर

फिर अल्लाह ने गुफा के साथियों की कहानी का उल्लेख किया : «जब वे युवक गुफा में जा पहुँचे»—अर्थात वे वहाँ चले गए। उनके गुफा जाने के कारण के बारे में मतभेद किया गया है। मुहम्मद बिन इस्हाक़ बिन यसार ने कहा : ईसा की किताब मानने वालों के मामलों में बिगाड़ आ गया था, उनके बीच पाप बढ़ गए थे और शासक सीमा से आगे बढ़ गए थे, यहाँ तक कि उन्होंने मूर्तियों की पूजा और झूठे पूज्यों के लिए बलि देना शुरू कर दिया। उनमें कुछ लोग अब भी मसीह के दीन पर जमे हुए थे और अल्लाह की इबादत तथा उसकी एकता को मानते थे।

उनके शासकों में रोम का एक राजा था, जिसे “दक़यानूस” कहा जाता था। वह मूर्तियों की पूजा करता, झूठे पूज्यों के लिए बलि देता और उसका विरोध करने वालों को मार डालता था। वह रोम के गाँवों में उतरता और जिस गाँव में भी पड़ाव डालता, वहाँ किसी को नहीं छोड़ता, बल्कि उसे इस बात की परीक्षा में डालता कि वह मूर्तियों की पूजा और झूठे पूज्यों के लिए बलि दे; अन्यथा वह उसे मार डालता। फिर वह गुफा के साथियों के नगर, “अफ़सूस”, में पहुँचा।

जब वह वहाँ उतरा तो ईमानवालों पर यह बात बहुत भारी पड़ी; वे उससे छिपने लगे और हर ओर भाग गए। दक़यानूस ने नगर में आने पर आदेश दिया कि ईमानवालों का पीछा करके उन्हें उसके पास इकट्ठा किया जाए। उसने नगर के काफ़िरों में से पहरेदार नियुक्त किए, जो ईमानवालों को उनके ठिकानों पर ढूँढ़ते और उन्हें दक़यानूस के पास ले आते। वह उन्हें चुनने का अवसर देता : या तो वे मारे जाएँ, या मूर्तियों की पूजा करें और झूठे पूज्यों के लिए बलि दें।

उनमें से कुछ जीवन को प्राथमिकता देते और कुछ अल्लाह के सिवा किसी की इबादत करने से इनकार करते, तो उन्हें मार दिया जाता। जब ईमान में दृढ़ लोगों ने यह देखा तो वे यातना और हत्या के लिए स्वयं को पेश करने लगे। उन्हें मारकर उनके अंग काट दिए जाते, फिर उनके कटे हुए अंगों को नगर की दीवारों पर और उसके दरवाज़ों के पास टाँग दिया जाता। इस तरह फ़ितना बहुत बढ़ गया।

जब युवकों ने यह देखा तो वे बहुत दुखी हुए। वे खड़े होकर नमाज़, रोज़े, सदक़े, अल्लाह की तस्बीह और दुआ में लग गए। वे रोम के प्रतिष्ठित लोगों में से थे और आठ व्यक्ति थे। वे रोए, विनती की और कहने लगे : “हमारा पालनहार आकाशों और धरती का पालनहार है।

हम उसके सिवा किसी को पूज्य नहीं पुकारेंगे; ऐसा करने पर तो हमने सीमा से बढ़कर बात कही होगी। यदि हम उसके सिवा किसी की इबादत करें! ऐ अल्लाह, अपने ईमानवाले बंदों से यह फ़ितना दूर कर दे और यह विपत्ति उनसे हटा दे, ताकि वे खुलकर तेरी इबादत कर सकें।” इसी हालत में, जब वे अपनी इबादतगाह में दाख़िल थे, पहरेदार उन तक पहुँच गए।

उन्होंने उन्हें सजदे में, मुँह के बल पड़े, रोते और अल्लाह से विनती करते हुए पाया। पहरेदारों ने उनसे कहा : “तुम राजा के आदेश का पालन करने से क्यों रुके हुए हो? उसके पास चलो।” फिर वे निकले और पहरेदारों ने उनका मामला दक़यानूस के सामने रखा।

उन्होंने कहा : “तुम लोगों को अपने पूज्यों के लिए बलि करने के वास्ते इकट्ठा कर रहे हो, लेकिन ये युवक—जो तुम्हारे अपने परिवारों में से हैं—तुम्हारा मज़ाक़ उड़ाते हैं और तुम्हारे आदेश की अवज्ञा करते हैं!” यह सुनकर उसने उन्हें बुलवाया। उन्हें उसके सामने लाया गया तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे और उनके चेहरे मिट्टी से सने हुए थे। उसने उनसे कहा : “तुम्हें धरती पर पूजे जाने वाले हमारे पूज्यों के लिए बलि में शामिल होने और अपने नगर के सरदारों के लिए मिसाल बनने से किस चीज़ ने रोका?

चुन लो : या तो हमारे पूज्यों के लिए बलि करो, या मैं तुम्हें मार डालूँगा।” उनमें सबसे बड़े मक्सलमीना ने कहा : “हमारा एक ऐसा पूज्य है जिसकी महानता ने आकाशों और धरती को भर दिया है। हम कभी उसके सिवा किसी को पूज्य नहीं पुकारेंगे। सारी प्रशंसा, बड़ाई और पवित्रता की घोषणा हमारे दिलों से केवल उसी के लिए है।

हम केवल उसी की इबादत करते हैं और उसी से मुक्ति तथा भलाई माँगते हैं। लेकिन हम कभी झूठे पूज्यों की इबादत नहीं करेंगे। अब हमारे साथ जो चाहो, करो।” मक्सलमीना के साथियों ने भी दक़यानूस से वही बात कही। जब उन्होंने ऐसा कहा तो उसने आदेश दिया कि उनके महान लोगों जैसे वस्त्र उतार लिए जाएँ।

फिर उसने कहा : “मैं तुमसे निपटूँगा और तुम्हें उस सज़ा में डालूँगा जिसका मैंने वादा किया है। लेकिन मैं तुम्हें तुरंत सज़ा इसलिए नहीं दे रहा कि तुम कम उम्र के नौजवान हो। मैं तुम्हें तब तक नष्ट करना पसंद नहीं करता, जब तक तुम्हें कुछ समय न दे दूँ, ताकि तुम सोच-विचार करके अपनी समझ पर लौट आओ।” फिर उसने उनके सोने-चाँदी के आभूषण उतरवा दिए और उन्हें अपने पास से बाहर निकालने का आदेश दिया।

दक़यानूस अपने कुछ कामों के लिए उनके नगर से पास ही के दूसरे नगर को चला गया। जब युवकों ने उसके जाने को देखा तो वे उसके लौटने से पहले ही जल्दी करने लगे। उन्हें भय था कि लौटकर वह उन्हें याद करेगा। उन्होंने आपस में सलाह की कि हर व्यक्ति अपने पिता के घर से कुछ धन ले, उसमें से सदक़ा कर दे, शेष को यात्रा के लिए रखे और फिर नगर के पास एक पहाड़ में मौजूद गुफा में चला जाए।

वे वहाँ रहकर अल्लाह की इबादत करेंगे। जब दक़यानूस लौटेगा तो वे उसके सामने आ जाएँगे और वह उनके साथ जो चाहे करे। यह बात तय होने पर हर युवक अपने पिता के घर गया, कुछ धन लिया, उसमें से सदक़ा दिया और शेष लेकर चल पड़ा। उनका एक कुत्ता भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ा।

वे उस गुफा तक पहुँचे और वहाँ रहने लगे। कअब अल-अहबार ने कहा : वे एक कुत्ते के पास से गुज़रे, वह उनके पीछे चल पड़ा। उन्होंने उसे भगाया, लेकिन उसने कई बार ऐसा ही किया। तब कुत्ते ने उनसे कहा : “ऐ लोगो, तुम मुझसे क्या चाहते हो?

मेरी ओर से मत डरो। मैं अल्लाह के प्रिय लोगों से प्रेम करता हूँ। तुम सो जाओ, मैं तुम्हारी रखवाली करूँगा।” इब्न अब्बास ने कहा : वे रात में दक़यानूस से भागे थे। वे सात थे। रास्ते में एक चरवाहे से मिले, जिसके साथ एक कुत्ता था।

चरवाहा उनके दीन पर उनका साथी बन गया और उसका कुत्ता भी उसके पीछे चल पड़ा। वे नगर से निकलकर गुफा तक पहुँचे, जो नगर के पास थी। इब्न इस्हाक़ ने कहा : वे वहाँ रहे और उनका काम केवल नमाज़, रोज़ा, तस्बीह, तकबीर और अल्लाह की प्रशंसा करना था, ताकि वे उसकी प्रसन्नता प्राप्त करें। उन्होंने अपना धन उनमें से एक युवक, जिसका नाम तमलीखा था, को सौंपा।

वह उनमें सबसे सुंदर और सबसे मज़बूत था। वह चुपके से उनके लिए भोजन खरीदने नगर जाता। नगर में प्रवेश करने पर वह अपने अच्छे कपड़े उतारकर भिक्षा माँगने वाले निर्धनों जैसे कपड़े पहनता, फिर अपने चाँदी के सिक्के लेकर नगर जाता, उनके लिए भोजन और पेय खरीदता तथा पता लगाता कि कहीं उसके और उसके साथियों का ज़िक्र तो नहीं हुआ। फिर वह अपने साथियों के पास लौट आता।

वे इसी तरह कुछ समय तक रहे। फिर दक़यानूस नगर में आया और नगर के सरदारों को आदेश दिया कि वे झूठे पूज्यों के लिए बलि करें। इससे ईमानवाले भयभीत हो गए। उस समय तमलीखा नगर में अपने साथियों के लिए भोजन खरीद रहा था। वह रोता हुआ अपने साथियों के पास लौटा।

उसके पास थोड़ा-सा भोजन था। उसने उन्हें बताया कि अत्याचारी नगर में आ चुका है, उनके बारे में भी चर्चा हुई है और नगर के सरदारों के साथ उनकी तलाश की जा रही है। वे भयभीत हो गए, सजदे में गिर पड़े, अल्लाह से दुआ और विनती करने लगे और फ़ितने से उसकी शरण माँगी। फिर तमलीखा ने उनसे कहा : “ऐ मेरे भाइयो, सिर उठाओ, भोजन करो और अपने पालनहार पर भरोसा रखो।”

उन्होंने सिर उठाए; उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। उन्होंने भोजन किया। उस समय सूरज डूब रहा था। फिर वे बैठकर बातें करने, एक-दूसरे को याद दिलाने और सीखने में लग गए। इसी दौरान अल्लाह ने गुफा में उन पर नींद डाल दी। उनका कुत्ता गुफा के द्वार पर अपने अगले पैर फैलाए बैठा था; उसे भी वही अवस्था हुई जो उन्हें हुई थी।

वे ईमानवाले और दृढ़ विश्वास रखने वाले थे और उनका धन उनके सिरों के पास रखा था। अगले दिन जब दक़यानूस को वे नहीं मिले तो उसने उन्हें ढूँढ़ा, लेकिन वे नहीं मिले। उसने अपने कुछ लोगों से कहा : “उन युवकों का मामला मुझे बहुत बुरा लगा, जो चले गए। उन्होंने शायद यह समझा कि मैं उनसे नाराज़ हूँ, क्योंकि वे मेरे बारे में सच्चाई नहीं जानते थे।

यदि वे पश्चात्ताप करके मेरे पूज्यों की इबादत करने लगें, तो मैं उन्हें दंडित नहीं करूँगा।” नगर के सरदारों ने कहा : “आप ऐसे दुराचारी, विद्रोही और अवज्ञाकारी लोगों पर दया करने के योग्य नहीं हैं। आपने उन्हें समय दिया था; यदि वे चाहते तो उस अवधि में लौट आते, लेकिन उन्होंने पश्चात्ताप नहीं किया।” यह सुनकर वह बहुत क्रोधित हुआ।

फिर उसने उनके पिताओं को बुलवाया और उनसे उनके बारे में पूछा : “मुझे अपने उन विद्रोही बेटों के बारे में बताओ, जिन्होंने मेरी अवज्ञा की।” उन्होंने कहा : “हमने तो आपकी अवज्ञा नहीं की, फिर आप हमें उन विद्रोही लोगों के कारण क्यों मारना चाहते हैं? वे हमारा धन लेकर गए और नगर के बाज़ारों में उसे खर्च कर दिया, फिर ब्ख़लूस नाम के पहाड़ पर चढ़ गए।” यह सुनकर उसने उन्हें जाने दिया।

वह नहीं जानता था कि उन युवकों के साथ क्या करे। अल्लाह ने उसके मन में डाला कि गुफा को बंद करने का आदेश दे। अल्लाह ने चाहा कि उन्हें सम्मान दे, उनके बाद आने वाली उम्मत के लिए उन्हें निशानी बनाए और लोगों पर स्पष्ट कर दे कि क़ियामत अवश्य आएगी और इसमें कोई संदेह नहीं, तथा अल्लाह क़ब्रों में पड़े लोगों को जीवित करेगा। दक़यानूस ने गुफा को बंद करने का आदेश दिया और कहा : “उन्हें गुफा में जैसे हैं वैसे ही रहने दो।

वे भूख और प्यास से मर जाएँगे और जिस गुफा को उन्होंने चुना है, वही उनकी क़ब्र होगी।” वह समझता था कि वे जाग रहे हैं और जानते हैं कि उनके साथ क्या किया जा रहा है; जबकि अल्लाह ने उनकी आत्माओं को नींद की अवस्था में उठा लिया था। उनका कुत्ता गुफा के द्वार पर अपने अगले पैर फैलाए था और उन पर जो अवस्था आई थी, वह उसे भी आ गई थी। वे दाएँ-बाएँ करवट बदलते रहे।

फिर दक़यानूस के महल में दो ईमानवाले व्यक्ति थे, जो अपना ईमान छिपाते थे। एक का नाम “यन्दरस” और दूसरे का नाम “रूनास” था। उन्होंने परामर्श करके युवकों का विवरण, उनकी वंशावलियाँ, नाम और समाचार सीसे की एक पट्टी पर लिखे और उसे ताँबे के संदूक में रख दिया। फिर संदूक को इमारत में चुनवा दिया।

उन्होंने कहा : “शायद क़ियामत से पहले अल्लाह इन युवकों के बारे में कुछ ईमानवालों को बता दे; तब जो लोग उन्हें खोज निकालेंगे, वे इस लिखे हुए को पढ़कर जान जाएँगे।” उन्होंने ऐसा ही किया और उस पर इमारत बना दी। दक़यानूस बहुत समय तक रहा, फिर वह और उसकी क़ौम मर गए। उनके बाद कई पीढ़ियाँ गुज़रीं और एक के बाद एक राजा शासन करते रहे।

उबैद बिन उमैर ने कहा : गुफा के साथी ऐसे युवक थे जो गले में हार और हाथों में कंगन पहने हुए थे, और उनके बालों की चोटियाँ थीं। उनके साथ उनका शिकारी कुत्ता था। वे अपने एक बड़े त्योहार में सुंदर वस्त्र और विशाल जुलूस के साथ निकले। वे अपने पूज्यों को भी साथ लाए, जिनकी वे इबादत करते थे।

अल्लाह ने उन युवकों के दिलों में ईमान डाल दिया था। उनमें से एक राजा का मंत्री था। वे ईमान ले आए, लेकिन हर एक ने अपना ईमान छिपाया। उन्होंने मन ही मन कहा : “हम इन लोगों के बीच से निकल जाएँ, ताकि उनके अपराध के कारण हम पर सज़ा न आए।”

उनमें से एक युवक निकला और एक पेड़ की छाया तक पहुँचकर वहाँ बैठ गया। फिर दूसरा निकला। उसने उसे अकेले बैठा देखा और उसे आशा हुई कि शायद वह भी उसी विचार पर हो, लेकिन उसने यह बात ज़ाहिर नहीं की। फिर तीसरा निकला और वे एक जगह इकट्ठा हुए।

उनमें से एक ने दूसरे से पूछा : “तुम सब यहाँ क्यों इकट्ठे हुए हो?” हर व्यक्ति अपनी जान के डर से अपने साथी से अपना ईमान छिपा रहा था। फिर उन्होंने कहा : “हर युवक अपने साथी के साथ अलग जाए और उनमें से एक अपने साथी के सामने अपना रहस्य प्रकट करे।” उन्होंने ऐसा किया तो पाया कि वे सब ईमान पर थे।

उनके पास पहाड़ में एक गुफा थी। उनमें से कुछ ने कहा : “तो गुफा में शरण ले लो; तुम्हारा पालनहार तुम्हारे लिए अपनी दया फैलाएगा।” वे अपने शिकारी कुत्ते के साथ गुफा में दाख़िल हुए और तीन सौ वर्ष तथा नौ वर्ष और रहे। उनकी क़ौम ने उन्हें खो दिया और उनकी तलाश की, लेकिन अल्लाह ने उनके निशान और गुफा को उनसे छिपा दिया।

लोगों ने एक पट्टी पर उनके नाम और वंश लिखे : “फलाँ, फलाँ और फलाँ, हमारे राजाओं के बेटे, फलाँ राजा के शासन के फलाँ वर्ष और फलाँ महीने में गुम हो गए।” उन्होंने वह पट्टी राजा के ख़ज़ाने में रख दी और कहा : “इस घटना का ज़रूर कोई महत्व होगा।” वह राजा मर गया और उसके बाद एक के बाद एक पीढ़ियाँ आती रहीं। वहब बिन मुनब्बिह ने कहा : ईसा अलैहिस्सलाम का एक हवारी गुफा के साथियों के नगर में आया और वहाँ प्रवेश करना चाहा।

उससे कहा गया : “नगर के द्वार पर एक मूर्ति है; जो भी नगर में प्रवेश करता है, उसे उसके सामने सजदा करना पड़ता है।” उसने वहाँ प्रवेश करना पसंद नहीं किया और नगर के पास एक स्नानगृह में गया। वह स्नानगृह के मालिक के यहाँ मज़दूरी करने लगा। स्नानगृह के मालिक ने उसके काम में बरकत देखी और उससे प्रेम करने लगा।

नगर के कुछ युवक भी उससे जुड़ गए। वह उन्हें आकाश और धरती के समाचार तथा आख़िरत की बातें बताता रहा, यहाँ तक कि वे ईमान ले आए और उसकी बात की पुष्टि की। उसने स्नानगृह के मालिक से यह शर्त रखी थी कि रात उसके लिए होगी और कोई उसे तथा नमाज़ को बीच में नहीं रोकेगा। यह सिलसिला चलता रहा।

एक दिन राजा का बेटा एक स्त्री को वहाँ लाया और उसके साथ स्नानगृह में दाख़िल हुआ। हवारी ने उसे बुरा-भला कहा : “तुम राजा के बेटे हो और इस स्त्री के साथ यहाँ आते हो?” वह शर्मिंदा होकर चला गया। फिर वह दोबारा आया तो हवारी ने उससे वही बात कही।

उसने उसे गाली दी और झिड़का, लेकिन उसने उसकी बात की परवाह नहीं की। वे दोनों भीतर गए और वहीं मर गए। राजा आया तो उससे कहा गया : “स्नानगृह के मालिक ने आपके बेटे को मार डाला।” उसने उसकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला; वह भाग गया था।

राजा ने पूछा : “उसके साथ कौन-कौन रहता था?” लोगों ने उन युवकों के नाम बताए। उनकी तलाश की गई तो वे नगर से बाहर निकल गए। रास्ते में उन्हें अपना एक ऐसा साथी मिला जो उनके ही ईमान पर था। वह उनके साथ चल पड़ा और उसके साथ एक कुत्ता भी था।

रात होने पर वे गुफा पहुँचे और उसमें दाख़िल हो गए। उन्होंने कहा : “इंशाअल्लाह, सुबह उठकर हम अपना मामला तय करेंगे।” फिर अल्लाह ने उन पर नींद डाल दी। राजा अपने लोगों के साथ उन्हें खोजता हुआ निकला और उन्हें पा लिया। वे गुफा में दाख़िल हुए, लेकिन जो भी व्यक्ति उसमें प्रवेश करना चाहता, वह भयभीत हो जाता और ऐसा नहीं कर पाता।

उनमें से एक ने कहा : “क्या तुम उन्हें पकड़ लेते तो मार न डालते?” उसने कहा : “हाँ।” उसने कहा : “तो गुफा का द्वार बंद करके उस पर इमारत बना दो।” फिर एक चरवाहा बारिश से बचने के लिए गुफा के पास पहुँचा। उसने कहा : “अगर मैं इस गुफा को खोल दूँ और बारिश से बचने के लिए अपनी भेड़ों को इसमें ले जाऊँ, तो अच्छा होगा।”

वह बराबर कोशिश करता रहा, यहाँ तक कि गुफा खोल दी। अगले दिन सुबह अल्लाह ने उनकी आत्माएँ लौटा दीं। मुहम्मद बिन इस्हाक़ ने कहा : फिर उस देश पर एक नेक राजा शासन करने लगा, जिसका नाम “बेद्रूस” था। उसके शासन के अड़सठ वर्ष बीत जाने के बाद उसके राज्य में लोगों के दल बन गए।

उनमें से कुछ अल्लाह पर ईमान रखते थे और जानते थे कि क़ियामत सत्य है, जबकि कुछ उसका इनकार करते थे। यह बात नेक राजा पर भारी पड़ी। वह रोया, अल्लाह से विनती की और बहुत दुखी हुआ, क्योंकि उसने देखा कि असत्य वाले बढ़ रहे हैं और सत्य वालों पर हावी हो रहे हैं। वे कहते थे : “जीवन तो बस इसी दुनिया का जीवन है।

केवल आत्माओं को फिर से उठाया जाएगा, शरीरों को नहीं।” बेद्रूस उन लोगों को संदेश भेजता, जिनसे उसे भलाई की आशा थी और जो लोगों के अगुआ थे, लेकिन वे भी क़ियामत का इनकार करते थे, यहाँ तक कि वे लोगों को सत्य और हवारियों के दीन से फेरने के करीब पहुँच गए। जब नेक राजा ने यह देखा तो वह अपने घर में दाख़िल हुआ, दरवाज़ा बंद कर लिया, टाट पहना और उसके नीचे राख बिछाकर उस पर बैठ गया। वह लंबे समय तक रात-दिन अल्लाह तआला से विनती करता और रोता रहा : “ऐ मेरे पालनहार, तू इन लोगों के मतभेद देख रहा है।

इनके लिए कोई निशानी भेज, जो इनके सामने बात स्पष्ट कर दे।” फिर अत्यंत दयावान, जो अपने बंदों का विनाश पसंद नहीं करता, उसने चाहा कि गुफा के साथियों को प्रकट करे, लोगों के सामने उनका मामला स्पष्ट करे और उन्हें उनके लिए निशानी तथा प्रमाण बनाए, ताकि वे जान लें कि क़ियामत अवश्य आएगी, इसमें कोई संदेह नहीं। वह अपने नेक बंदे बेद्रूस की दुआ स्वीकार करे, उस पर अपनी नेमत पूरी करे और बिखरे हुए ईमानवालों को इकट्ठा करे। अल्लाह ने उस नगर के एक व्यक्ति, जिसका नाम “औलियानूस” था, के मन में डाला कि वह गुफा के द्वार पर बनी इमारत को गिराकर उसकी सामग्री से अपनी भेड़ों के लिए बाड़ा बनाए।

उसने दो नौजवान मज़दूर रखे। वे पत्थर हटाकर बाड़ा बनाते रहे, यहाँ तक कि उन्होंने गुफा के द्वार की सारी रुकावटें हटा दीं और प्रवेशद्वार खोल दिया। अल्लाह ने लोगों के दिलों में भय डालकर उन्हें लोगों से छिपाए रखा। जब उन्होंने गुफा का द्वार खोला तो सामर्थ्य और सत्ता के मालिक, मुर्दों को जीवित करने वाले अल्लाह ने युवकों को गुफा के भीतर उठकर बैठने की अनुमति दी।

वे प्रसन्न थे, उनके चेहरे उजले और मन प्रसन्न थे। उन्होंने एक-दूसरे को सलाम किया, मानो वे उसी नींद से जागे हों जिससे वे हर रात सुबह उठते थे। फिर वे नमाज़ के लिए उठे और उसी तरह नमाज़ पढ़ी जैसे पढ़ा करते थे। उनके चेहरे और रंग में उन्हें कोई ऐसी बात दिखाई नहीं दी जो उन्हें अनजान लगे; वे उसी हालत में थे जिसमें सोए थे।

उन्हें लगा कि दक़यानूस अब भी उनकी तलाश में है। नमाज़ पूरी करके उन्होंने कहा : “हमारे खाने-पीने का इंतज़ाम करने वाले मलीखा, हमें बताओ कि कल शाम उस अत्याचारी के पास हमारे बारे में लोगों ने क्या कहा था?” उन्हें लगा कि वे उतनी ही देर सोए थे जितनी वे आम तौर पर सोते थे; लेकिन उन्हें यह भी आभास था कि वे सामान्य से अधिक देर तक सोए हैं, इसलिए उन्होंने आपस में पूछा : “हम कितनी देर सोए रहे?” उन्होंने कहा : “एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा।”

फिर उन्होंने कहा : “तुम्हारा पालनहार बेहतर जानता है कि तुम कितनी देर रहे।” उनके विचार में यह सब थोड़ी ही देर थी। मलीखा ने उनसे कहा : “लोगों ने नगर में तुम्हारी तलाश की, लेकिन तुम नहीं मिले। आज वे तुम्हें पकड़कर झूठे पूज्यों के लिए बलि करना चाहते हैं या तुम्हें मार डालेंगे।

इसके बाद जो अल्लाह चाहेगा, वही होगा।” मक्सलमीना ने उनसे कहा : “ऐ मेरे भाइयो, जान लो कि तुम अल्लाह से मिलने वाले हो। जब अल्लाह का दुश्मन तुम्हें बुलाए तो अपने ईमान के बाद कुफ़्र न करना।” फिर उन्होंने मलीखा से कहा : “नगर जाओ, सुनो कि वहाँ हमारे बारे में क्या कहा जा रहा है और दक़यानूस के पास हमारे बारे में क्या चर्चा है।

सावधानी रखना और किसी को तुम्हारे बारे में पता न चलने देना। हमारे लिए भोजन खरीदकर लाना और साथ में वह भोजन भी बढ़ाकर लाना जो हम लाए थे, क्योंकि हम भूखे हो गए हैं।” मलीखा पहले की तरह गया। उसने अपने कपड़े उतारे, भेस बदलने वाले कपड़े पहने और चाँदी के सिक्के लिए।

जब वह गुफा के द्वार से गुज़रा तो उसने देखा कि गुफा के मुहाने से पत्थर हटा दिए गए हैं। वह इस पर हैरान हुआ, लेकिन बिना रुके आगे चला और छिपकर नगर के द्वार तक पहुँचा। उसे डर था कि नगर का कोई व्यक्ति उसे पहचान न ले। उसे यह पता नहीं था कि दक़यानूस और उसके लोग तीन सौ वर्ष पहले मर चुके थे।

जब मलीखा नगर के द्वार पर पहुँचा तो उसने ऊपर देखा। द्वार पर ऐसा चिह्न बना था जो उस समय ईमानवालों के यहाँ दिखाई देता था जब ईमान प्रकट हो चुका हो। उसे देखकर वह हैरान रह गया। वह छिपकर उसे देखने लगा, फिर दाएँ-बाएँ देखने लगा। उसने उस द्वार को छोड़कर नगर के दूसरे द्वार की ओर रुख किया; वहाँ भी वैसा ही चिह्न देखा।

उसे लगने लगा कि यह वह नगर नहीं है जिसे वह जानता था। उसने बहुत से ऐसे लोगों को देखा जिन्हें उसने पहले कभी नहीं देखा था। वह चलता और हैरान होता रहा, उसे लगता था कि वह भ्रमित हो गया है। फिर वह उसी द्वार पर लौटा जिससे आया था।

वह अपने मन में कहने लगा : “काश मुझे पता होता कि यह क्या है! कल शाम तक ईमानवाले इस चिह्न को छिपाते और इससे बचते थे, लेकिन आज यह खुला दिखाई दे रहा है। क्या शायद मैं सो रहा हूँ?” फिर उसने देखा कि वह सो नहीं रहा था। उसने अपना चोग़ा सिर पर रखा और नगर में दाख़िल हुआ।

वह बाज़ार के बीच से गुज़रा तो लोगों को ईसा बिन मरयम के नाम की क़समें खाते सुना। इससे उसका भय और बढ़ गया। उसे लगा कि वह भ्रमित हो गया है। वह नगर की एक दीवार से पीठ टिकाकर खड़ा हुआ और मन में कहने लगा : “अल्लाह की क़सम, मैं नहीं जानता कि यह क्या है।

कल शाम धरती पर कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो ईसा बिन मरयम का नाम ले और उसे मार न दिया जाए; लेकिन आज सुबह मैं हर किसी को उनका नाम लेते और किसी से न डरते सुन रहा हूँ। शायद यह वह नगर नहीं है जिसे मैं जानता हूँ। मुझे तो अपने नगर के पास कोई दूसरा नगर मालूम नहीं।” वह भ्रमित-सा खड़ा रहा, फिर एक युवक से मिला और उससे पूछा : “ऐ युवक, इस नगर का क्या नाम है?”

उसने कहा : “इसका नाम अफ़सूस है।” उसने मन में कहा : “शायद मुझे कोई बीमारी या ऐसा मामला हो गया है जिसने मेरी बुद्धि छीन ली है। बेहतर है कि मैं अपमानित होने या किसी मुसीबत में पड़कर नष्ट होने से पहले यहाँ से जल्दी निकल जाऊँ।” फिर उसे होश आया और उसने कहा : “अल्लाह की क़सम, अगर लोगों के पहचानने से पहले मैं जल्दी से निकल जाऊँ तो मेरे लिए आसान होगा।”

फिर वह भोजन बेचने वालों के पास गया, अपने पुराने सिक्के निकाले और एक व्यक्ति से कहा : “इन सिक्कों से मुझे भोजन बेच दो।” उस व्यक्ति ने सिक्के लिए और उनकी बनावट तथा छाप देखकर हैरान हुआ। उसने सिक्के अपने एक साथी को दे दिए। उसने भी उन्हें देखा।

वे उन्हें एक-दूसरे के हाथ में देने लगे और हैरान होते रहे। फिर आपस में परामर्श करने लगे। उनमें से कुछ ने कहा : “इसने बहुत पुराने समय का कोई छिपा हुआ ख़ज़ाना पाया है।” जब मलीखा ने उन्हें अपने बारे में परामर्श करते देखा तो वह बहुत डर गया और काँपने लगा।

उसे लगा कि उन्होंने उसे पहचान लिया है और वे उसे अपने राजा दक़यानूस के पास ले जाना चाहते हैं। दूसरे लोग भी उसके पास आकर उसे पहचानने की कोशिश करने लगे। वह उनसे बहुत डरा हुआ था और बोला : “मुझ पर एहसान करो। तुमने मेरे सिक्के ले लिए हैं, उन्हें रख लो।

मुझे तुम्हारा भोजन नहीं चाहिए।” उन्होंने उससे कहा : “ऐ युवक, तुम कौन हो और तुम्हारा मामला क्या है? अल्लाह की क़सम, तुमने पुराने लोगों का ख़ज़ाना पाया है और उसे हमसे छिपाना चाहते हो। हमारे साथ चलो, हमें दिखाओ और उसमें हमें साझेदार बनाओ।

हम तुम्हें तुम्हारी पाई हुई चीज़ के बारे में कुछ नहीं कहेंगे। यदि तुम ऐसा नहीं करोगे तो हम तुम्हें शासक के पास ले जाएँगे और वह तुम्हें मार डालेगा।” उनकी बात सुनकर उसने मन में कहा : “मैं उसी मुसीबत में पड़ गया जिससे डर रहा था।” उन्होंने कहा : “ऐ युवक, अल्लाह की क़सम, तुम उस चीज़ को छिपा नहीं सकते जो तुम्हें मिली है।”

मलीखा को समझ नहीं आ रहा था कि उनसे क्या कहे और क्या जवाब दे। वह इतना भयभीत था कि कुछ बता भी नहीं पा रहा था। जब उन्होंने देखा कि वह बोल नहीं रहा, तो उन्होंने उसका चोग़ा उसकी गर्दन में डाल दिया और उसे नगर की गलियों में खींचते हुए ले जाने लगे। नगर के लोगों को उसकी ख़बर हो गई।

कहा जाने लगा : “यह वह आदमी है जिसके पास ख़ज़ाना है।” नगर के छोटे-बड़े लोग उसके चारों ओर इकट्ठा हो गए, उसे देखने लगे और कहने लगे : “अल्लाह की क़सम, यह युवक इस नगर का नहीं है। हमने इसे यहाँ कभी नहीं देखा और न ही इसे जानते हैं।” मलीखा को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे।

नगर के लोग उसके पास इकट्ठा हुए तो वह डर के मारे चुप हो गया। उसे पूरा विश्वास था कि उसके पिता और भाई नगर में हैं और नगर के बड़े लोगों में उसका परिवार तथा वंश पहचाना जाता है; उसे लगा कि उसके बारे में सुनकर वे उसे छुड़ाने आ जाएँगे। जब वह भ्रमित-सा खड़ा था और इंतज़ार कर रहा था कि उसका कोई परिजन आए और उसे उनके हाथों से छुड़ाए, तभी वे उसे नगर के दो प्रमुख शासकों और प्रबंधकों के पास ले गए। वे दोनों नेक व्यक्ति थे।

एक का नाम “अरियूस” और दूसरे का “तन्तियूस” था। जब उसे उनके पास ले जाया जा रहा था तो मलीखा ने समझा कि वे उसे अत्याचारी दक़यानूस के पास ले जा रहे हैं। वह दाएँ-बाएँ देखने लगा। लोग उसका मज़ाक़ उड़ा रहे थे, जैसे किसी पागल का मज़ाक़ उड़ाते हैं।

मलीखा रोने लगा, फिर उसने आकाश की ओर सिर उठाकर मन ही मन कहा : “ऐ आकाश और धरती के पालनहार, आज मुझे धैर्य प्रदान कर और अपने पास से ऐसी शक्ति मेरे साथ भेज, जिससे इस अत्याचारी के सामने तू मेरी सहायता करे।” वह रोता हुआ मन में कह रहा था : “मुझे मेरे भाइयों से अलग कर दिया गया। काश, उन्हें पता होता कि मेरे साथ क्या हुआ है, ताकि वे मेरे पास आकर हम सब इस अत्याचारी के सामने एक साथ खड़े होते। हमने तो वचन लिया था कि हम साथ रहेंगे, अल्लाह का इनकार नहीं करेंगे और उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराएँगे।

मुझे उनसे अलग कर दिया गया; अब न वे मुझे देखेंगे और न मैं उन्हें, कभी नहीं। हमने वचन लिया था कि जीवन में या मृत्यु में कभी अलग नहीं होंगे।” मलीखा अपने मन में यह सब कहता हुआ, उन दो नेक लोगों अरियूस और तन्तियूस तक पहुँचा। जब उसने देखा कि वे उसे दक़यानूस के पास नहीं ले जा रहे, तो उसे होश आया और उसका रोना बंद हो गया।

अरियूस ने सिक्के लिए। दोनों ने उन्हें देखकर आश्चर्य किया। उनमें से एक ने कहा : “ऐ युवक, तुम्हें ख़ज़ाना कहाँ मिला?” मलीखा ने कहा : “मुझे कोई ख़ज़ाना नहीं मिला। ये मेरे पुरखों के सिक्के हैं और इन पर इस नगर की वही छाप तथा बनावट है।

लेकिन अल्लाह की क़सम, मैं नहीं जानता कि मेरा मामला क्या है और तुम्हें क्या कहूँ।” उनमें से एक ने कहा : “तो तुम कौन हो?” मलीखा ने कहा : “मैं तो समझता था कि मैं इसी नगर का रहने वाला हूँ।” उन्होंने कहा : “तुम्हारा पिता कौन है और इस नगर में तुम्हें कौन जानता है?”

उसने उन्हें अपने पिता का नाम बताया, लेकिन कोई उसे या उसके पिता को नहीं जानता था। उनमें से एक ने उससे कहा : “तुम झूठे आदमी हो। हमें सच नहीं बता रहे।” मलीखा समझ नहीं पा रहा था कि क्या कहे, इसलिए उसने सिर झुका लिया। उसके आसपास के कुछ लोगों ने कहा : “यह आदमी पागल है।”

कुछ ने कहा : “यह पागल नहीं, बल्कि जानबूझकर अपने को मूर्ख बना रहा है, ताकि तुमसे छूट सके।” उनमें से एक ने उसे ग़ौर से देखते हुए कहा : “क्या तुम समझते हो कि हम तुम्हें छोड़ देंगे और तुम्हारी इस बात पर विश्वास कर लेंगे कि यह माल तुम्हारे पिता का है, जबकि इन सिक्कों की छाप और बनावट तीन सौ वर्ष से भी पुरानी है? तुम तो अभी युवा हो। क्या तुम समझते हो कि तुम हमें धोखा दे सकते हो और हमारा मज़ाक़ उड़ा सकते हो, जबकि हम बूढ़े हो चुके हैं, जैसा कि तुम देख रहे हो?

तुम्हारे आसपास नगर के सरदार और उसके प्रशासक हैं, इस नगर के ख़ज़ाने हमारे हाथ में हैं, लेकिन हमारे पास इस बनावट का एक दिरहम या दीनार तक नहीं है। मुझे लगता है कि मैं तुम्हें कड़ी यातना देने का आदेश दूँगा और फिर बाँध दूँगा, यहाँ तक कि तुम उस ख़ज़ाने को स्वीकार कर लो जिसे तुमने पाया है।” यह सुनकर मलीखा ने उनसे कहा : “मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ। यदि तुम उसका जवाब दो तो मैं तुम्हें अपने मामले के बारे में सच बता दूँगा।”

उन्होंने कहा : “पूछो, हम तुमसे कुछ नहीं छिपाएँगे।” उसने पूछा : “राजा दक़यानूस के साथ क्या हुआ?” उन्होंने कहा : “आज धरती पर हमें दक़यानूस नाम का कोई राजा मालूम नहीं। वह एक बहुत पुराने समय का राजा था; उसे मरे हुए युगों बीत चुके हैं और उसके बाद कई पीढ़ियाँ मर चुकी हैं।”

मलीखा ने कहा : “तो मैं सचमुच भ्रमित हूँ और लोग मेरी बात पर विश्वास नहीं करेंगे। हम कुछ युवक थे और राजा ने हमें मूर्तियों की पूजा तथा झूठे पूज्यों के लिए बलि देने पर मजबूर किया। हम कल शाम उससे भागे और सो गए। जब जागा तो अपने साथियों के लिए भोजन खरीदने तथा ख़बरें जानने निकला।

और अब मैं वैसा ही हूँ जैसा तुम देख रहे हो। मेरे साथ गुफा तक चलो, जो ब्ख़लूस पहाड़ में है; मैं तुम्हें अपने साथियों को दिखाऊँगा।” मलीखा की बात सुनकर अरियूस ने कहा : “ऐ लोगो, शायद यह अल्लाह की निशानियों में से एक निशानी है, जिसे अल्लाह ने इस युवक के माध्यम से तुम्हारे लिए प्रकट किया है। चलो, यह हमें अपने साथियों को दिखाए।”

अरियूस और अस्तियूस उसके साथ चले और नगर के छोटे-बड़े लोग भी गुफा के साथियों को देखने के लिए उनके पीछे चल पड़े। जब गुफा के युवकों ने देखा कि मलीखा उनके भोजन और पेय के साथ नियत समय तक नहीं लौटा, तो उन्होंने सोचा कि उसे पकड़ लिया गया है और उनके राजा दक़यानूस के पास ले जाया गया है। वे इसी बारे में सोच रहे थे और भयभीत थे कि उन्हें घोड़ों के दौड़ने की आवाज़ और शोर सुनाई दिया। घोड़े उनकी ओर पहाड़ पर चढ़ रहे थे।

उन्हें लगा कि ये अत्याचारी दक़यानूस के सिपाही हैं, जिन्हें उन्हें उसके पास ले जाने के लिए भेजा गया है। वे नमाज़ के लिए खड़े हुए, एक-दूसरे को सलाम किया और एक-दूसरे को नसीहत की। उन्होंने कहा : “चलो, अपने भाई मलीखा के पास चलते हैं; वह अब अत्याचारी के सामने है और हमारी प्रतीक्षा कर रहा है कि हम उसके पास आएँ।” वे गुफा के बीच में बैठे यह बात कर रहे थे, लेकिन उन्हें गुफा के द्वार पर खड़े अरियूस और उसके साथियों के अलावा कोई दिखाई नहीं दिया।

मलीखा उनसे पहले ही भीतर जा चुका था। वह रोता हुआ उनके पास दाख़िल हुआ। जब उन्होंने उसे रोते देखा तो वे भी उसके साथ रोए। फिर उन्होंने उससे उसके मामले के बारे में पूछा। उसने उन्हें सब कुछ बताया। तब उन्हें पता चला कि वे अल्लाह के आदेश से इतने समय तक सोए रहे थे और उन्हें लोगों के लिए निशानी तथा पुनरुत्थान की पुष्टि बनाने के लिए जगाया गया था, ताकि वे जान लें कि क़ियामत अवश्य आएगी और इसमें कोई संदेह नहीं।

मलीखा के पीछे अरियूस भी भीतर आया। उसने ताँबे का एक संदूक देखा, जिस पर चाँदी की मुहर लगी थी। वह गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ और नगर के एक बड़े व्यक्ति को बुलाया। उसने उनके सामने संदूक खोला। उसमें सीसे की दो पट्टियाँ थीं, जिन पर लिखा था : “मक्सलमीना, मख़्शलमीना, मलीखा, मरतूनस, कश्तूनस, यबरूनस, दीमूस, बतीूस और हालूश—ये युवक दक़यानूस अत्याचारी राजा से इस भय से भागे कि वह उन्हें उनके दीन के मामले में फ़ितने में डाल देगा।

वे इस गुफा में दाख़िल हुए। जब राजा को उनके ठिकाने का पता चला तो उसने गुफा को पत्थरों से बंद करने का आदेश दिया। हमने उनका मामला और समाचार लिख दिया है, ताकि बाद में आने वाले लोग, यदि उन्हें पा लें, तो जान सकें।” जब लोगों ने इसे पढ़ा तो वे हैरान हुए और उन्होंने अल्लाह की प्रशंसा की कि उसने उन्हें उनके सामने पुनरुत्थान की निशानी दिखा दी।

फिर उन्होंने ऊँची आवाज़ में अल्लाह की प्रशंसा और तस्बीह की। वे गुफा में युवकों के पास गए और उन्हें वहाँ बैठे पाया; उनके चेहरे चमक रहे थे और उनके कपड़े पुराने नहीं हुए थे। अरियूस और उसके साथी सजदे में गिर पड़े और अल्लाह की प्रशंसा की कि उसने उन्हें अपनी निशानियों में से एक निशानी दिखाई। फिर वे एक-दूसरे से बातें करने लगे।

युवकों ने उन्हें बताया कि उनके राजा दक़यानूस ने उनके साथ क्या किया था। फिर अरियूस और उसके साथियों ने अपने नेक राजा बेद्रूस के पास संदेशवाहक भेजा : “शीघ्र हमारे पास आइए। शायद आप अल्लाह की उन निशानियों में से एक निशानी देखेंगे, जिसे उसने आपके राज्य में प्रकट किया है और संसार के लोगों के लिए निशानी बनाया है, ताकि यह उनके लिए प्रकाश और मार्गदर्शन तथा पुनरुत्थान की पुष्टि बने। उन युवकों के पास शीघ्र आइए, जिन्हें अल्लाह ने जीवित किया है, जबकि वह उन्हें तीन सौ से अधिक वर्ष पहले मृत्यु दे चुका था।”

जब राजा को यह ख़बर मिली तो उसकी समझ लौट आई और उसकी चिंता दूर हो गई। उसने कहा : “मैं आकाशों और धरती के पालनहार अल्लाह की प्रशंसा करता हूँ। मैं उसी की इबादत करता हूँ और उसी की तस्बीह करता हूँ। तूने मुझ पर कृपा की और मुझ पर दया की; तूने उस प्रकाश को बुझने नहीं दिया, जिसे तूने मेरे पूर्वजों—नेक बंदे राजा अस्टिनतिनूस—के लिए स्थापित किया था।”

नगर के लोगों ने जब राजा को यह समाचार दिया तो वह उनके पास सवार होकर निकला। उसके साथ लोग भी चले, यहाँ तक कि वे अफ़सूस नगर पहुँचे। नगर के लोगों ने उनका स्वागत किया और राजा के साथ गुफा की ओर पहाड़ पर चढ़े। जब युवकों ने बेद्रूस को देखा तो वे उससे प्रसन्न हुए और मुँह के बल सजदे में गिर पड़े।

बेद्रूस खड़ा हुआ, उनसे लिपटकर रोया। वे उसके सामने धरती पर बैठे अल्लाह की तस्बीह और प्रशंसा कर रहे थे। फिर युवकों ने बेद्रूस से कहा : “हम तुम्हें अल्लाह के सुपुर्द करते हैं। तुम पर सलाम और अल्लाह की दया हो। अल्लाह तुम्हारी और तुम्हारे राज्य की रक्षा करे।

हम तुम्हें इंसानों और जिन्नों की बुराई से अल्लाह की शरण में देते हैं।” राजा अभी खड़ा ही था कि वे अपनी सोने की जगहों पर लौट गए। अल्लाह तआला ने उनकी आत्माएँ ले लीं। राजा उनके पास आया, उनके ऊपर उनके कपड़े रखे और आदेश दिया कि हर व्यक्ति को सोने के संदूक में रखा जाए।

जब रात हुई और राजा सो गया तो वे उसके सपने में आए और कहा : “हम सोने या चाँदी से नहीं बनाए गए। हम मिट्टी से बनाए गए हैं और मिट्टी ही की ओर लौटेंगे। हमें गुफा में मिट्टी पर वैसे ही रहने दो, ताकि अल्लाह हमें उसी से उठाए।” तब राजा ने सागवान की लकड़ी का एक संदूक बनवाया और उन्हें उसमें रख दिया।

जब लोग वहाँ से निकले तो अल्लाह ने भय डालकर उन्हें गुफा के भीतर जाने से रोक दिया; कोई भी उनके पास प्रवेश नहीं कर सका। राजा ने गुफा के द्वार पर एक मस्जिद बनाने का आदेश दिया, जिसमें नमाज़ पढ़ी जाए। उसने उनके लिए एक बड़ा त्योहार निर्धारित किया और आदेश दिया कि उसे हर वर्ष मनाया जाए। कहा गया है कि जब मलीखा को नेक राजा के पास लाया गया तो राजा ने उससे पूछा : “तुम कौन हो?”

उसने कहा : “मैं इस नगर का रहने वाला हूँ।” उसने बताया कि वह कल या कुछ दिन पहले वहाँ से निकला था और अपने घर तथा ऐसे लोगों का ज़िक्र किया जिन्हें कोई नहीं जानता था। राजा ने सुना था कि पुराने समय में कुछ युवक गुम हो गए थे और उनके नाम ख़ज़ाने में रखी पट्टी पर लिखे थे। उसने वह पट्टी मँगवाई और उन नामों को देखा।

वह उन्हीं लोगों में से था। उसने दूसरों के नाम बताए तो मलीखा ने कहा : “वे मेरे साथी हैं।” यह सुनकर राजा और उसके साथ के लोग सवार होकर चले। जब वे गुफा के द्वार पर पहुँचे तो मलीखा ने कहा : “मुझे अपने साथियों के पास जाने दो, ताकि मैं उन्हें खुशख़बरी दूँ।

यदि वे तुम्हें मेरे साथ देखेंगे तो भयभीत हो जाएँगे।” वह भीतर गया और उन्हें खुशख़बरी दी। फिर अल्लाह ने उनकी आत्माएँ ले लीं और उनके निशान लोगों से छिपा दिए, इसलिए वे उनका पता न लगा सके। यही अल्लाह तआला का कथन है : «जब वे युवक गुफा में जा पहुँचे»—अर्थात वे गुफा में गए।

अरबी में कहा जाता है : “फलाँ व्यक्ति किसी जगह की ओर ‘आवा’”—अर्थात उसने उसे अपना ठिकाना बनाया। गुफा पहाड़ बन्जलूस में एक कंदर है और गुफा का नाम “ख़ैरम” है। «तो उन्होंने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर»—दया से अभिप्राय दीन में मार्गदर्शन है।

यह भी कहा गया है कि इससे अभिप्राय रोज़ी है। «और हमारे लिए व्यवस्था कर»—अर्थात हमारे लिए आसान कर दे। «हमारे मामले में सही राह»—अर्थात वह चीज़ जो तेरी प्रसन्नता पाने के लिए माँगी जाती है और जिसमें हमारी भलाई है। इब्न अब्बास ने कहा : “रशदन” का अर्थ है गुफा से सुरक्षित निकलने का रास्ता। </div>

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सहीह मुस्लिम (हदीस संख्या 809) में दज्जाल के फ़ितनों से सुरक्षा के लिए सूरह अल-कहफ़ की पहली दस आयतें याद करने की फ़ज़ीलत का वर्णन आया है।

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